यूपी के मदरसों में सर्वे के नाम पर हुआ बड़ा खेल! नाराज हुए उलेमा

यूपी के मदरसों में सर्वे के नाम पर हुआ बड़ा खेल! नाराज हुए उलेमा

लखनऊ: बता दें कि यूपी में मदरसों का सर्वे शुरू हो चुका है।हालांकि इसमें उलेमाओं की मर्जी नहीं थी कि मदरसों का सर्वे कराया जाए। इस बात को लेकर के मुस्लिम उलेमा योगी सरकार से काफी नाराज हैं कि किसी एक मजहब को यह उसके इंस्टीट्यूटो को क्यों निशाना बनाया जा रहा है। आखिरकार सरकार के इसके पीछे क्या इरादे हैं कि मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है? यह एक बड़ा सवाल है।

क्यों हो रहा है मदरसों का सर्वे

दरअसल योगी सरकार के माइनॉरिटी विभाग की तरफ से एक नोटिस जारी किया गया। कि उत्तर प्रदेश में ऐसे कितने मदरसे हैं। जो कि बिना मान्यता प्राप्त हैं ऐसे मदरसों का सर्वे किया जाएगा और उनमें यह पता लगाया जाएगा कि उसमें बेसिक शिक्षा देने के लिए जो पैरामीटर सरकार की तरफ से सेट किए गए हैं। उनमें से कितनी फैसिलिटी बच्चों और स्टाफ को दी जा रही हैं। अब सबसे बड़ा सवाल तो यहां यह बनता है कि क्या जो सरकार के सरकारी स्कूल हैं। क्या उनमें वह सुविधाएं दी जा रही हैं? जिसका सरकार ने ऐलान किया हुआ है। देखा जाए तो बहुत से स्कूलों में बच्चों के लिए शौचालय का इंतजाम भी पूरा पूरा नहीं है।

लेकिन सर्वे होना है मदरसों का, यह बात आप सब लोग भी जानते हैं कि आखिरकार क्यों मदरसे का सर्वे होना है? इससे सरकार को क्या फायदा पहुंचेगा? लेकिन योगी सरकार का इस पर साफ कहना है कि मदरसों का सर्वे इसलिए किया जा रहा है कि मदरसों में बच्चों और शिक्षकों को किस तरह की सुविधाएं दी जा रही हैं? किस तरह के उनके टीचर हैं क्या वह इस लायक है भी के वह बच्चों को पढ़ा सके? इसलिए उन मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है जो गैर मान्यता प्राप्त हैं लेकिन सवाल यह बनता है कि जो मदरसे मान्यता प्राप्त हैं क्या उनमें यह सुविधाएं दी जा रही हैं या नहीं और क्या सरकार ने मान्यता प्राप्त मदरसों में उन मूलभूत सुविधाओं का आकलन कराया? क्योंकि आज तक मदरसों का कोई इस तरह का सर्वे हुआ ही नहीं है।

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पहली बार उत्तर प्रदेश के अंदर इस तरह से मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है। इसको लेकर के असदुद्दीन ओवैसी जो एआईएमआईएम के अध्यक्ष हैं। उन्होंने भी कुछ सवाल खड़े किए थे कि जो मदरसे सरकार से किसी तरह का कोई फंड या सहायता नहीं लेते और कौम के चंदे पर चलते हैं तो आखिरकार क्या वजह है कि योगी सरकार उनका सर्वे करा रही है? लेकिन अगर कोई और परेशानी है सरकार को तो वह एक अलग बात है। फिर भी सरकार एक ही बात पर डटी हुई है कि मदरसों में किस तरह की सुविधाएं दी जा रही है। उसके लिए मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है। उसके लिए मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है।

बहरहाल उत्तर प्रदेश में मदरसों का सर्वे शुरू हो चुका है। एसडीएम की अध्यक्षता में तीन सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई है। जिसमें पूरे जिले के मदरसों का सर्वे कराया जाएगा। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट एडीएम को देगी, एडीएम इस रिपोर्ट को डीएम तक पहुंचाएगा और डीएम सीएम को रिपोर्टिंग करेगा। उत्तर प्रदेश में हर जिले में मदरसों का सर्वे शुरू हो चुका है। बुलंदशहर, अलीगढ़, बाराबंकी, खुर्जा आदि अलग-अलग जिलों में जैसे ही है सर्वे शुरू हुआ तो जमीअत उलमा हिंद और मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड के अध्यक्ष मौलाना असद मदनी का एक बयान सामने आया है।

मौलाना असद मदनी का कहना यह है कि अगर मदरसों का सर्वे कराया जा रहा है तो दूसरे शिक्षण संस्थानों का सर्वे क्यों नहीं कराया जा रहा है? क्या सरकारी स्कूलों का सर्वे कराया जा रहा है? क्या दूसरे और लोग भी स्कूल चला रहे हैं क्या उनका सर्वे कराया जा रहा है या किसी दूसरे मजहब के इंस्टिट्यूट सर्वे कराया जा रहा है? यह कहना है मौलाना असद मदनी का, लेकिन योगी सरकार ने ना तो मौलाना असद मदनी की सुनी और ना ही असदुद्दीन ओवैसी बस उसने एक ही बात ठान ली है कि मदरसों का सर्वे कर रहा है।

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