न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत को 100 रनों की जीत में चने चबाने पढ़े

न्यूजीलैंड के खिलाफ भारत को 100 रनों की जीत में चने चबाने पढ़े

न्यूजीलैंड के खिलाफ दूसरे T-20 में भारत ने 100 रनों का टारगेट 19.5 ओवरों में चेज तो कर लिया लेकिन इस मुकाबले से कई सवाल भी खड़े हुए। सबसे पहला तो यह कि भारत ने जितने भी टी-20 मुकाबले खेले हैं, उसमें पहली बार ऐसा हुआ कि किसी भी पारी में एक भी छक्का नहीं लगा। हम जीत जरूर गए लेकिन हार की दहलीज पर पहुंच कर।

भारत ने जो टीम मैदान में उतारी, क्या इस टीम के बूते पर हम अगला T-20 वर्ल्ड कप जीतने का सोच सकते हैं? शुभ्मन गिल और राहुल त्रिपाठी की क्रिकेट के सबसे छोटे फॉर्मेट में निरंतर विफलता बदलाव की मांग करती है। विराट कोहली के बिना मिडिल ऑर्डर बहुत कमजोर दिखाई पड़ रहा है।

शुभ्मन गिल फिलहाल वनडे के सर्वश्रेष्ठ ओपनर्स की लिस्ट में शामिल हैं और 70 की उनकी औसत इस बात की गवाही देती है। पर सवाल यह है कि अगर कोई खिलाड़ी वनडे में सफल है, तो जरूरी नहीं है कि वह T-20 इंटरनेशनल में भी सफल हो जाएगा? न्यूजीलैंड के खिलाफ पहले टी-20 में भारत 176 रनों का टारगेट चेज कर रहा था।

मिचेल सैंटनर ने चौथे ओवर की पहली गेंद थोड़ी धीमी रखी और बल्ले से दूर ऑफ स्टंप के बाहर की तरफ स्पिन करवाई। गिल पुल शॉट खेलने के लिए गए और चिप शॉट खेलकर मिडविकेट के हाथों में आसान सा कैच दे बैठे। उन्होंने बनाए 6 गेंदों पर 7 और भारत को 15 के स्कोर पर तीसरा झटका लग गया। आगे चलकर भारत यह मैच हार गया।

दूसरे T-20 में टीम इंडिया के सामने 120 गेंदों पर 100 रनों का लक्ष्य था। माइकल ब्रेसवेल ने चौथे ओवर की पांचवीं गेंद शॉर्टिश ऑफ ब्रेक रखी। स्पिन और बाउंस पर काबू पाने में चूक और पुल शॉट खेलने की फिराक में टॉप एज सीधा डीप स्क्वायर लेग फील्डर के हाथ में। टीम इंडिया को 17 के स्कोर पर पहला झटका लगा और शुभ्मन गिल लगातार दूसरे T-20 में पुल शॉट खेलते हुए आउट हो गए। दूसरे मुकाबले में गिल के खाते में 9 गेंदों पर महज 11 रन आए।

तमाम क्रिकेट एक्सपर्ट रोहित शर्मा और पृथ्वी शॉ को टी-20 में बतौर ओपनर सर्वश्रेष्ठ विकल्प मान रहे हैं। इस टीम में अगर हिटमैन को नहीं लिया गया है, तो क्या पृथ्वी शॉ को बतौर सलामी बल्लेबाज अवसर नहीं मिलना चाहिए था?

सलामी बल्लेबाजी की बात तो हो गई, विराट कोहली की अनुपस्थिति में फर्स्ट डाउन बैटिंग कर रहे राहुल त्रिपाठी ने भी अब तक निराश ही किया है। त्रिपाठी लगातार बड़े शॉट खेलने के लिए जाने जाते हैं, लेकिन जब सामने क्वालिटी बॉलिंग आती है तो वह अंडर प्रेशर परफॉर्म नहीं कर पाते हैं। पहले टी-20 में लगातार डॉट गेंदे खेलने के बाद राहुल बड़ी शिद्दत से बड़े शॉट की तलाश कर रहे थे।

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चौथे ओवर में जैकब डफी ने लगातार गुड लेंथ पर गेंदबाजी की और गेंदों को बाहर की तरफ शेप किया। यानी फिफ्थ स्टंप के आसपास। चौथी गेंद भी कुछ इसी तरह की थी और राहुल त्रिपाठी ने हार्ड हैंड से मिडविकेट की दिशा में बड़ा शॉट खेलने का प्रयास किया। आउटसाइड एज विकेटकीपर के दस्तानों में और राहुल 6 गेंदें खेलकर बगैर खाता खोले लौट गए।

दूसरे टी-20 में विकेट मुश्किल था और राहुल त्रिपाठी चौथे ओवर में मैदान पर आने के बाद 10 ओवरों तक बीच मैदान मौजूद थे। ऐसे में फर्स्ट डाउन बल्लेबाजी करने वाले प्लेयर का जिम्मा बनता है कि वह टीम को जीत की दहलीज तक ले जाए। 11वें ओवर की चौथी गेंद स्पिनर ईश सोढ़ी ने फुलर लेंथ की लेग ब्रेक डाली। राहुल एक पैर पर बैठकर स्वीप खेलने के लिए तैयार हो गए।

एलिवेशन मिला नहीं और प्लेसमेंट सीधा डीप मिडविकेट फील्डर के हाथ में। राहुल ने बनाए 18 गेंदों पर 13 और भारत का स्कोर हो गया 50 पर 3 आउट। ऐसे में सवाल है कि क्या 34 वर्षीय विराट कोहली को टी-20 फॉर्मेट से ड्रॉप कर राहुल त्रिपाठी पर फर्स्ट डाउन खेलते हुए टीम इंडिया को वर्ल्ड कप जिताने की जिम्मेदारी दी जा सकती है?

एक और दिलचस्प बात यह है कि एक्सप्रेस स्पीड तेज गेंदबाज उमरान मलिक को टी-20 फॉर्मेट में अवसर नहीं दिया जा रहा है। इस साल T-20 वर्ल्ड कप में एवरेज स्पीड वाले तेज गेंदबाजों के कारण सेमीफाइनल गंवाने वाली टीम इंडिया अब भी उमरान पर दांव खेलने के लिए तैयार नहीं है।

कोई गेंदबाज अगर लगातार 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करते हुए बल्लेबाजों पर दबाव बनाता है, तो उसे टीम में चुनने में दिक्कत क्या है? उम्मीद है कि 1 फरवरी को अहमदाबाद में होने वाले सीरीज के निर्णायक टी-20 मुकाबले में गलतियों को सुधारा जाएगा। पृथ्वी शॉ को बतौर ओपनर और उमरान मलिक को तेज गेंदबाज के तौर पर टीम इंडिया में अवसर जरूर दिया जाएगा।