के एल राहुल की ये रोचक तथ्य आप को सोचने पर मजबूर कर देंगे

के एल राहुल की ये रोचक तथ्य आप को सोचने पर मजबूर कर देंगे

Ind vs SA T20 series: के एल राहुल…! भारतीय टीम के उपकप्तान। हकीकत है कि फॉर्म अच्छा नहीं चल रहा। 150 की स्ट्राइक रेट से बैटिंग नहीं कर पा रहे हैं। साउथ अफ्रीका के खिलाफ पहले T-20 में 56 बॉल पर 91 की स्ट्राइक रेट से 51* रन। इस पारी में एक दौर ऐसा भी था, जब राहुल ने 31 गेंदें खेलने के बावजूद केवल 14* रन बनाए थे। पावरप्ले के दौरान उनके बल्ले से काफी धीमी गति से रन आए थे।

भारतीय क्रिकेट ने लंबे वक्त तक वीरेंद्र सहवाग जैसा ओपनर देखा है, जो टेस्ट में भी T-20 का मजा देता था। ऐसे में राहुल की बल्लेबाजी को लेकर सवाल उठने भी चाहिए। पर क्या साउथ अफ्रीका के खिलाफ अगर राहुल तेज खेलकर अपना विकेट गंवा देते तो उसे समझदारी कहा जाता? क्या देश राहुल को टीम को मझधार में छोड़ने का दोषी नहीं ठहराता? आइए, पूरा मामला समझाते हैं।

तिरुअनंतपुरम की पिच को देखकर जोहानेसबर्ग की विकेट याद आ रही थी। साधारण बॉल भी काफी स्विंग हासिल कर पा रही थी। ऐसे में अफ्रीका के तमाम दिग्गज बल्लेबाज मिलकर 20 ओवर्स में केवल 106 रन जोड़ पाए। 107 रनों का टारगेट चेज करने रोहित शर्मा के साथ केएल राहुल मैदान पर आए। हिटमैन बगैर खाता खोले रबाडा का शिकार बन गए और 3 रन बनाकर विराट कोहली भी एनरिक नॉर्त्या की गेंद पर पवेलियन लौट गए। रबाडा और नॉर्त्या फिलहाल इंटरनेशनल क्रिकेट में दुनिया की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी जोड़ी है। ऐसे में संकट की घड़ी थी।

सातवां ओवर चल रहा था और स्कोरबोर्ड पर रन टंगे थे मात्र 17। अब अगर सूर्यकुमार यादव की बैटिंग से आप राहुल की तुलना करेंगे तो यह बेमानी है। सूर्या फिलहाल भारत ही नहीं दुनिया के नंबर वन T-20 बल्लेबाज बन चुके हैं। उनको पिच, विकेट, गेंद और गेंदबाज से फर्क नहीं पड़ता। वह अपनी ही धुन में खेलते हैं और गेंदबाज को लाइन-लेंथ बदलने के लिए मजबूर कर देते हैं। दूसरी ओवर की दूसरी गेंद पार्नेल ने आउटसाइड लेग डाली थी और राहुल को उस पर सिर्फ बल्ला लगाना था। चौका आसानी से मिल गया। रबाडा के पांचवें ओवर की दूसरी गेंद पर राहुल के बल्ले का किनारा लगा और बॉल तीनों स्लिप फील्डर को दगा देते हुए सीमा रेखा तक पहुंच गई। इन दोनों शॉट्स को आप लकी मान सकते हैं।

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पिच का मिजाज समझते हुए यहां से राहुल ने सतर्कता भरी बैटिंग की और अपना पहला छक्का एनरिक नॉर्त्या की बॉलिंग पर 10वें ओवर की आखिरी गेंद पर जड़ा। उन्होंने फुलर लेंथ की डिलीवरी को लॉन्गऑन के ऊपर से फ्लिक कर दिया। इस शॉट में पहले वाले केएल का क्लास और स्टाइल नजर आया। क्या खूबसूरत टाइमिंग …! 12वें ओवर की पहली गेंद तबरेज शम्सी ने शॉट डाली। गेंद बिल्कुल नहीं उठी और डीप मिडविकेट की दिशा में लंबा छक्का। अब राहुल थोड़े-थोड़े कंफर्टेबल नजर आ रहे थे। वह पिच का बाउंस और मिजाज समझ चुके थे। 15वें ओवर की तीसरी गेंद नॉर्त्या ने यॉर्कर डालने के चक्कर में फुलटॉस डाल दी और एक्स्ट्रा कवर के ऊपर से लॉफ्टेड सिक्स। तोहफा था, जिसे राहुल ने दोनों हाथों से कबूल किया। जब फॉर्म अच्छा नहीं होता, तो ऐसे तोहफे किस्मत से मिलते हैं।

17वें ओवर की चौथी गेंद थी और राहुल 45 पर खेल रहे थे। भारत 2 विकेट के नुकसान पर 104 रन बना चुका था और उसे मुकाबला जीतने के लिए 3 रन की दरकार थी। स्लॉग स्वीप की मदद से बैकवर्ड स्क्वायर लेग की दिशा में खूबसूरत छक्का। स्लॉट में मिली फुलर लेंथ की डिलीवरी पर राहुल को ऐसा छक्का जड़ते हुए फैंस ने पहले कई बार देखा है लेकिन यह सबसे स्पेशल था। दबाव और आलोचनाओं के बीच घुटना टिका कर माही के अंदाज में मैच खत्म।

स्कोरबोर्ड जरूर कहेगा कि टी-20 क्रिकेट में 100 से कम की स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी करना गुनाह है लेकिन क्रिकेट के असली फैंस जानते हैं कि राहुल ने डटकर मुकाबला किया। नागिन सी फुफकारती गेंदों के बीच भी खड़ा रहा और भारत को जीत दिलाकर ही वापस लौटा। उम्मीद की जानी चाहिए कि यह इनिंग उसका आत्मविश्वास बढ़ाएगी। अब हमें पहले की तरह केएल राहुल की ताबड़तोड़ बल्लेबाजी नजर आएगी।