डेथ ओवर्स में बॉलिंग को बात लो मान, टीम इंडिया में हर हाल में चाहिए उमरान

डेथ ओवर्स में बॉलिंग को बात लो मान, टीम इंडिया में हर हाल में चाहिए उमरान

नई दिल्ली: ताबड़तोड़ बल्लेबाजी और अक्षर पटेल की उम्दा गेंदबाजी की बदौलत भारत ने ऑस्ट्रेलिया को 9 साल बाद घरेलू टी-20 सीरीज में 2-1 से हरा दिया। पर डेथ ओवर्स में इंडियन बॉलर्स की धुनाई ने फैंस को बेहद निराश किया। निर्णायक तीसरे टी-20 के 18वें ओवर में बुमराह ने 21 तो वहीं भुवनेश्वर ने 18 रन लुटा दिया। परिणाम रहा कि कंगारुओं ने स्कोरबोर्ड पर 187 रन लगा दिया। हर बार जरूरी नहीं है कि बल्लेबाज बड़ा टारगेट चेज कर पाएंगे और हम टी-20 वर्ल्ड कप का हर मैच जीत जाएंगे। ऐसे में उमरान की एक्सप्रेस स्पीड को भी आजमाया जाना चाहिए। उसे डेथ ओवरों में अवसर दिया जाना चाहिए।

हिंदुस्तानी क्रिकेट का इतिहास उठाकर देख लो, भारत में बल्लेबाज तो बहुत नामी-गिरामी हुए लेकिन गेंदबाजों के मामले में हम अक्सर मात खाते रहे। कभी नहीं सुना भारत के लिए किसी इमरान खान, वकार यूनिस और शोएब अख्तर सरीखे तेज गेंदबाज ने अपनी बॉलिंग से कहर बरपा दिया। ऐसा इसलिए भी शायद क्योंकि हमारे देश में फास्ट बॉलिंग को प्रमोट करने का कल्चर नहीं रहा। कभी किसी बॉलर को पूरी जान लगा कर गति से गेंदबाजी करने के लिए किसी कोच ने नहीं कहा। इसका नतीजा कई बार बड़े मुकाबले गंवा कर हिंदुस्तान ने भुगता।

ऐसे में 22 साल का लड़का उमरान अचानक आईपीएल 2022 से पूरे देश के दिलो-दिमाग पर छा गया। फैंस कह उठे कि आखिरकार हिंदुस्तानी शोएब अख्तर आ गया।
पहले ही मुकाबले से एहसास हो गया था कि इस बार आईपीएल में हार्दिक पंड्या की गुजरात टाइटंस बाकी सब टीमों पर भारी पड़ेगी। उस गुजरात के खिलाफ उमरान ने 27 अप्रैल को 5 विकेट चटकाया। तूफानी बल्लेबाजी कर रहे हार्दिक को भी कान के पास से सीटी बजाती हुई बाउंसर कर दिखाया। लगातार डेढ़ महीने तक 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हर मैच में बॉलिंग करना इतना आसान नहीं है। इस स्पीड के साथ 14 मुकाबलों में 22 विकेट चटकाते हुए उमरान ने ‘इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन’ का खिताब जीता।

बदले में उसे सीधा साउथ अफ्रीका के खिलाफ टी-20 सीरीज के लिए चुन लिया गया लेकिन डेब्यू करने का मौका नहीं दिया गया। आयरलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ भारत की दूसरे दर्जे की टीम के साथ तीन मैच में अवसर देकर उमरान को पूरी तरीके से इंडियन टीम से बाहर कर दिया गया। हकीकत यह है कि फल बेचने वाले के बेटे उमरान ने 17 साल की उम्र तक लेदर बॉल को हाथ भी नहीं लगाया था। मोहल्ला टेनिस बॉल क्रिकेट खेलकर किसी मैच में 500 किसी में 1000 रुपए कमाया था।

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2017 में जम्मू कश्मीर के मौलाना अबुल कलाम स्टेडियम में उस वक्त अनुभवी बल्लेबाज जतिन माधवन बैटिंग कर रहा था। कोच रणधीर मन्हास से मिन्नतें करके उमरान ने उसके खिलाफ नंगे पैर बॉल डाली और उसे चारों खाने चित कर दिया। ऐसा करके कोच का दिल जीत लिया। बदले में उन्होंने उमरान को अंडर-19 की ट्रेनिंग के लिए भेज दिया।

किस्मत देखिए, कूच बिहार ट्रॉफी में खेलने का मौका मिला लेकिन उड़ीसा के खिलाफ बारिश के कारण बर्बाद हो गए मैच के सिवा उसे फिर टीम में शामिल नहीं किया गया। उसी दौरे पर एक दिन असम के कोच ने कहा कि मेरे बल्लेबाजों को नेट्स पर बॉलिंग कर दो। फिर 15 मिनट में हाथ जोड़ दिया कि तुम्हारे गेंदों से मेरे बल्लेबाज चोटिल हो जाएंगे। फिर हम अपना मैच भी नहीं खेल पाएंगे।

बचपन में जम्मू कश्मीर के स्टार बल्लेबाज अब्दुल समद उमरान से कहते थे कि तुम्हारी गेंद धीमी आ रही है, और तेज करो। इसके बाद उमरान टेनिस बॉल से ही स्पीड का हर रिकॉर्ड तोड़ देते थे। बल्लेबाजों को हवा की रफ्तार से बातें करती गेंदबाजी के दम पर सन्न छोड़ देते थे। सनराइजर्स हैदराबाद के तरफ से आईपीएल खेलने के पहले उमरान ने कभी जिम नहीं किया। वह घर के बगल में तवी नदी के किनारे रेतीले मैदान पर दौड़ा करते थे। जब टेनिस बॉल क्रिकेट खेलने जाते थे तो पिता कई बार फल दुकान छोड़कर बेटे पीछा करते थे। अब्बू देखना चाहते थे कि कहीं बेटा क्रिकेट छोड़कर गलत संगत में तो नहीं चला गया।

बाद में पिता समझ गए कि उमरान को सिर्फ और सिर्फ क्रिकेट का नशा है। जिस उमरान ने गरीबी की मार को झेलकर खुद को दुनिया का सबसे तेज गेंदबाज बनाया है, उसके साथ बिल्कुल भी अन्याय नहीं किया जाए। भारत की कमजोर बॉलिंग लाइनअप को मजबूत करने के लिए उमरान को हर हाल में टीम इंडिया में मौका दिया जाए। अगर उमरान को अवसर नहीं दिया जाएगा तो आने वाले वर्षों में कोई बॉलर 155 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से गेंदबाजी करने के लिए जान नहीं लगाएगा।

यकीन है कि अपनी बॉलिंग से कहर बरपाएगा
उमरान टीम इंडिया को लगातार मैच जिताएगा