ISRO के सबसे छोटे रॉकेट SSLV की लॉंचिंग फेल, ऑरबिट तक नहीं पहुंच पाया सैटेलाइट

ISRO के सबसे छोटे रॉकेट SSLV की लॉंचिंग फेल, ऑरबिट तक नहीं पहुंच पाया सैटेलाइट

नई दिल्ली। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा आज देश का नया रॉकेट स्मॉल सैटेलाइट व्हीकल लॉन्च किया गया लेकिन यह रॉकेट अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाया। यह लॉंचिंग आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर के लॉन्च पैड एक से की गई।

इसरो का कहना है कि इसके सारे चरण सामान्य रहे परंतु जिस ऑरबिट में इसे स्थापित होना था, वहां तक नहीं पहुंचा। वह सैटेलाइट अब किसी भी काम का नहीं रहा। इसके फेल होने की वजह का पता कर लिया गया है। अब इसके समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।

साथ ही इसरो ने कहा कि बहुत जल्दी एसएसएलवी डी-2 लॉन्च किया जाएगा। साथ ही एक कमेटी का गठन होगा, जो कि इस सैटेलाइट के फेल होने की वजह का अध्ययन करेगी।

इससे पहले इसरो ने ट्ववीट करते हुए कहा था कि वह अपने सबसे छोटे रॉकेट एसएसएलवी-डी1 के प्रक्षेपण पर “डेटा का विश्लेषण” कर रहा है, जो आज सुबह श्रीहरिकोटा के अंतरिक्ष केंद्र से पृथ्वी अवलोकन उपग्रह और एक छात्र उपग्रह लेकर गया।

इसरो अध्यक्ष एस सोमनाथ ने कहा कि SSLV-D1 ने सभी चरणों में अपेक्षित रूप से प्रदर्शन किया। मिशन के अंतिम चरण में, कुछ डेटा में दिक्कत आ रही है। हम एक स्थिर कक्षा प्राप्त करने के संबंध में मिशन के अंतिम परिणाम को समाप्त करने के लिए डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं।

एसएसएलवी 34 मीटर लंबा है, जो पीएसएलवी से लगभग 10 मीटर कम लंबाई है और पीएसएलवी के 2.8 मीटर की तुलना में इसका व्यास दो मीटर है। पीएसएलवी का वजन 320 टन है, जबकि एसएसएलवी का 120 टन है।

ये भी पढ़ें  राजनाथ सिंह ने अंडमान और निकोबार द्वीपों की 2 दिवसीय यात्रा के समापन से पहले इंदिरा प्वाइंट का दौरा किया

पीएसएलवी 1800 किलोग्राम वजन के पेलोड को ले जा सकता है। भारत का पहला सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल 3 जिसे 1980 में लॉन्च किया गया था, वो 40 किग्रा तक के पेलोड ले जा सकता था।