सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस की सरकार को खरी खरी, कहा ‘हम डरने वाले नहीं’

सांसदों के निलंबन पर कांग्रेस की सरकार को खरी खरी, कहा ‘हम डरने वाले नहीं’

नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की चेतावनी के बावजूद तख्तियां दिखाने और कार्यवाही बाधित करने के कारण कांग्रेस के चार सांसदों मनिकम टैगोर, टीएन प्रतापन, जोथिमणि और राम्या हरिदास को शेष सत्र के लिए लोकसभा से निलंबित कर दिया गया।

पार्टी सांसदों के निलंबन को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा है, साथ ही कहा कि हम इससे डरने वाले नहीं हैं। लोकसभा में कांग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने कहा, “सरकार हमारे सांसदों को निलंबित करके हमें डराने की कोशिश कर रही है। उनकी क्या गलती थी? वे उन मुद्दों को उठाने की कोशिश कर रहे थे जो लोगों के लिए मायने रखते हैं।” उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी इस तरह नहीं झुकेगी।

उन्होंने कहा, “सांसद गैस सिलेंडर की कीमतों में वृद्धि, आटा और छाछ जैसी वस्तुओं पर जीएसटी लगाने के मुद्दों को उठाते हुए तख्तियां लिए हुए थे। हमने इन मुद्दों पर चर्चा की मांग करते हुए एक स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन कोई चर्चा नहीं हुई।”

सांसदो के निलंबित होने पर कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि से निलंबित करना ठीक नहीं है। लोकतंत्र में अगर सच को सदन के सामने रखते हैं और उनको डराने की कोशिश सरकार द्वारा की जाती है तो यह बहुत गलत बात है। इसका मतलब यही है कि मोदी जी लोकतंत्र को खत्म करना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रोटोकॉल के तहत फडणवीस कैसे आएं, मुख्यमंत्री शिंदे भी पहले पंक्ति में कैसे आ गए? आप अपने लोगों को आगे बैठाते हो और एक मान्यता प्राप्त विपक्षी नेता को नजरअंदाज कर देते हो तो यह ठीक नहीं है।

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वहीँ कांग्रेस सांसदों के निलंबन को जायज करार देते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा कि स्पीकर के चेहरे के सामने तख्तियां फहराना, क्या कोई तरीका होता है? स्पीकर के चेतावनी देने के बाद भी उन्होंने ऐसा किया। इसका मतलब उनके मन में कानून और पद का सम्मान नहीं है। उन्हें मतदान से नहीं बल्कि सदन की सेवाओं से निलंबित किया गया है।

वहीँ दूसरी तरफ आज दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिवों, प्रभारी और सांसदों की बैठक बुलाई गई। माना जा रहा है कि इस बैठक से पहले कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि महंगाई के मुद्दे पर विपक्ष एक साथ है। लेकिन सरकार इस पर चर्चा करने से कतरा रही है। सरकार ने इस मुद्दे पर चर्चा करने के बजाय विपक्ष की आवाज को धमकाने के लिए हमारे (चार) सांसदों को निलंबित करने का क्रूर कदम उठाया है।