भारत की हार के बाद भुवनेश्वर की महँगी बोलिंग के साथ इनकी भी

भारत की हार के बाद भुवनेश्वर की महँगी बोलिंग के साथ इनकी भी

Ind vs Aus T20 Series: एशिया कप में साधारण प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम को उम्मीद थी की अपने घर में वो ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ़ जीत से शुरुआत करेगी. भारत ने मोहाली में पहले टी20 में ऑस्ट्रेलिया के सामने 209 रनों का रिकॉर्ड लक्ष्य रखा लेकिन इसके बावजूद टीम 4 विकेटों से मैच हार गई. आख़िर क्या हैं वो मुख्य वजह जिनके कारण टीम इंडिया पिट गई?

1) डेथ ओवर्स में फिर पिटे

अंतिम 4 ओवरों में भारत की बोलिंग ना सिर्फ़ इस मैच में भारत के हार की सबसे बड़ी वजह रही, आने वाले वर्ल्ड कप में भी ये टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है.

कप्तान रोहित शर्मा ने भी हार का सबसे बड़ा कारण यही माना. मैथ्यू हेडन के लिए भी यही चीज़ भारत की सबसे बड़ी कमज़ोरी रही और रवि शास्त्री ने भी कहा कि रोहित शर्मा को इसका तोड़ निकालना होगा, ज़रूर बुमराह की वापसी होगी लेकिन अंतिम 4 ओवरों में भारतीय टीम जिस तरह से रन लुटा रही है उसे रोकना होगा.

मंगलवार को ऑस्ट्रेलिया को आखिरी 4 ओवरों में 55 रन बनाने थे और उन्होंने 53 रन उन्नीसवें ओवर तक ही बना लिए थे और डेथ ओवर्स का फ़ंदा भारतीय बोलर्स के गले ही डाल दिया था.

2) भुवनेश्वर कुमार की बोलिंग

एशिया कप में अगर कमज़ोर हॉंगकॉंग और अफ़ग़ानिस्तान के विरुद्ध मैच को निकाल दें तो भुवी का स्पेल श्रीलंका के ख़िलाफ़ था 30-0, सुपर-4 में पाकिस्तान के विरुद्ध 40 -1 और लीग मैच में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ चार ओवर में 26-4.

मंगलवार को भुवनेश्वर कुमार ने 4 ओवरों में 52 रन दिए और उन्हें एक भी सफ़लता नहीं मिली. हालांकि भुवनेश्वर अभी भी अच्छी स्विंग कराते हैं लेकिन उनका पेस इतना कम हो चुका है कि स्लॉग ओवर्स में जो भी चाहे उन्हें पीट दे रहा है.

डेथ ओवर्स में भारत के ख़राब बोलिंग की वजह उनकी महंगी गेंदबाज़ी भी रही है.

3) साधारण फील्डिंग और छूटे कैच

पूरे मैच में भारत की फ़ील्डिंग निचले स्तर की रही. क़रीबी मैचों में जानदार फ़ील्डिंग टीम का हौसला बढ़ाती है, लेकिन मोहाली में हुआ इसके विपरीत. भारत को रवींद्र जडेजा जैसे फ़ील्डर की कमी खली जो ना सिर्फ़ रन रोकते बल्कि मुश्किल कैच भी आसान बना देते हैं. पहले टी20 में भारत ने तीन कैच छोड़े और वो भी ग्रीन, वेड और स्मिथ के जो ऑस्ट्रेलिया के लिए इस मैच में पहले तीन उच्चतम रन स्कोरर रहे.

4) चहल की तेज़ी

हालांकि भारतीय तेज़ गेंदबाज़ शुरु में पिट रहे थे लेकिन एक समय अक्षर पटेल ने शानदार गेंदबाज़ी कर भारत को मैच में वापस ला दिया था. जहां पटेल ने 17 रन खर्च करके 3 विकेट निकाले, वहीं दूसरी छोर पर ज़्यादा अनुभवी युजवेंद्र चहल 3.2 ओवरों में 42 रन देकर बुरी तरह से पिट गए.

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चहल को अक्षर से कुछ सीख लेकर गेंद को स्लो रखना चाहिए था और विकेट-टू-विकेट बोलिंग करनी चाहिए थी. लेकिन उन्होंने स्पिनर्स के लिहाज़ से तेज़ बोलिंग की जिसकी निंदा गावस्कर ने भी अपने कमेंट्री में की.

5 आलराउंडर की कमी

भारतीय टीम में ऑलराउंडर की बड़ी कमी नज़र आ रही है जिसकी वजह से टीम का बैलेंस सही नहीं हो पा रहा है. सिर्फ़ हार्दिक पंड्या ही ऐसे खिलाड़ी हैं जो बैट और बॉल दोनों से मैच पलट सकते है.

वहीं इसके विपरीत वर्ष 1983, 1985, 2007 और 2011में जब भी भारतीय टीम ने वर्ल्ड कप जैसी बड़ी ट्रॉफ़ी पर कब्ज़ा किया तो हर वक्त टीम के पास 3-4 ऐसे खिलाड़ी थे जो क्रिकेट की कम से कम दो कलाओं में माहिर थे. मौजूदा टीम में भारत के पास सिर्फ़ हार्दिक ही ऐसे खिलाड़ी हैं और अगर वो गेंदबाज़ी में पिट जाते हैं तो उसका असर भारतीय बोलिंग पर साफ़ दिखाई देता है.

6) ऑस्ट्रेलिया के टॉप 3 की बैटिंग

ऑस्ट्रेलिया की जीत में उनकी शानदार बैटिंग का भी बड़ा योगदान रहा. 209 रनों के विशाल स्कोर का पीछा करते हुए ऑस्ट्रेलिया को शुरुआत तेज़ करनी थी और बैटिंग में ज़रूरी रिस्क भी लेना था. मिच मार्श जैसे फॉर्म में बैटर के न रहने पर कंगारुओं ने युवा कैनरून ग्रीन को मौक़ा दिया जिसे उन्होंने दोनों हाथों से कबूल किया.

ग्रीन ने 30 गेंदों पर 61 रन बना डाले और पहले विकेट के लिए कप्तान फ़िंच के साथ 3.3 ओवरों में 39 रनों की पार्टनरशिप की.

फ़िंच के आउट होने का बाद स्मिथ और ग्रीन ने बड़ी साझेदारी की और दूसरे विकेट के लिए 83 रन जोड़े. पहले दस ओवरों में ऑस्ट्रेलिया ने 1 विकेट खोकर 109 रन बना लिए थे और अपनी टीम को ड्राइविंग सीट पर ला दिया था. जिस आसानी से ग्रीन और कंपनी बाउंड्रीज़ लगा रही थी की मैथ्यू हेटडन ने कमेंट्री में कहा कि ये कोई प्रैक्टिस मैच लग रहा, भारतीय गेंदबाज़ी इतनी लचर और ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग इतनी शानदार हो रही है

7) वेड की फ़िनिश

अगर ग्रीन ने ऑस्ट्रेलिया को शुरुआत दिलाई थी तो मैथ्यू वेड ने फ़िनिश दिलाई. वेड ने 21 गेंदों पर नाबाद 45 रन बनाए और भारत में खेलने का आईपीएल के अनुभव का पूरा फ़ायदा उठाया. ना सिर्फ़ उन्होंने ग्राउंड के हर हिस्से में शॉट्स लगाए, जितनी कलात्मकता से उन्होंने नंबर सात पर बैटिंग की उसकी सराहना विरोधी टीम ने भी की.