मुस्लिम है तो पाकिस्तानी सरदार है तो खालिस्तानी कहने वालों सुन लो

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Ind vs pak Asiacup 2022: सब क्रिकेट एक्सपर्ट बनकर कल से अर्शदीप सिंह को गालियां देने में लगे हुए हैं।‌ लेकिन क्या भारत की हार के लिए यह अकेला भारतीय युवा गेंदबाज जिम्मेदार है ? बिल्कुल नहीं। गलतियां और खिलाड़ियों से भी हुई हैं। बल्लेबाजों से भी हुई हैं गेंदबाजों से भी हुई हैं। तो फिर गालियां सिर्फ अर्शदीप सिंह को क्यों ??

दरअसल, इस खेल का यही दस्तूर है और सिर्फ इसी खेल का नहीं दुनिया के हर खेल का यही दस्तूर है कि एक पल में आप लोगों की नजर में हीरो बन जाते हैं और अगले ही पल विलेन। ऐसा पहले भी हुआ है और आगे भी होता रहेगा। अर्शदीप ने ऐसे मौके पर कैच छोड़ा जब मैच बिल्कुल तुला हुआ था और कैच पकड़ा जाता तो शायद मैच का नतीजा कुछ और हो सकता था।

लोगों का गुस्सा स्वाभाविक है क्योंकि यह भारत और पाकिस्तान का मैच था, हम चाहे हॉन्गकॉन्ग से हार जाते हमें उतना फर्क नहीं पड़ता लेकिन हमारे लोगों को पाकिस्तान से हारना कतई मंजूर नहीं है। इसी गुस्से में लोगों के मुंह से गालियां भी निकली, बहुतों ने अर्शदीप के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर कमेंट में खूब गालियां सुनाई जोकि बहुत ग़लत बात है। लेकिन क्या यह कोई पहली बार हुआ है? और क्या यह सिर्फ भारत में ही होता है? नहीं मित्रों ऐसा बिल्कुल नहीं है न तो यह पहली बार हुआ है और ही यह सिर्फ भारत में होता है और ना ही यह क्रिकेट तक सीमित है।

दुनिया के हर खिलाड़ी को चाहे वो कोई भी खेल खेलता हो इस चीज का सामना करना ही पड़ता है। लोग ये भुल जाते हैं कि आपने पहले देश के लिए क्या क्या किया है। अर्शदीप से पहले भी बहुत से भारतीय क्रिकेटरों को खराब प्रदर्शन पर गालियां पड़ी हैं। युवराज सिंह जो 2007 और 2011 वर्ल्ड कप के हीरो थे वो 2014 के टी20 वर्ल्ड कप के फाइनल में एक ख़राब पारी की वजह से लोगों की नजर में जीरो बन गए। जब युवराज ने टी-20 फाइनल में श्रीलंका के खिलाफ 21 गेंदों में 11 रन की धीमी पारी खेली तो लोगों ने उनको हार का जिम्मेदार ठहराते हुए खुब गालियां दी।

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2017 चैंपियन ट्रॉफी में में हार्दिक पांड्या को रन आउट कराने पर रवींद्र जडेजा को गालियां पड़ी, धोनी, सहवाग, सचिन सभी को कभी ना कभी गालियां पड़ी हैं। विराट कोहली को तो अब भी गालियां पड़ती हैं जब भी वह खराब प्रदर्शन करता है लोग खूब ट्रोल करते हैं। इसलिए इससे कोई खिलाड़ी बचा नहीं है। खिलाड़ियों को इसी चीज के साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए। क्योंकि 100 फिसदी लोग कभी अच्छे नहीं होते। कितना ही अच्छा कर लो देश के लिए 2-4 फिसदी लोग तो गालियां देते वाले मिल ही जाएंगे।

आजकल तो सिर्फ खिलाड़ियों के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर गालियां देकर काम चल जाता है। 2007 के वनडे वर्ल्ड कप में तो जब भारतीय टीम बांग्लादेश से हारकर ग्रुप स्टेज से ही बाहर हो गई थी। तब गालियां तो पड़ी ही ऊपर से भारतीय खिलाड़ियों के घरों पर पत्थर तक फेंके गए थे।

पिछले साल वर्ल्ड कप में कैच छोड़ने पर हसन अली को पाकिस्तान में गालियां पड़ी, मैथ्यू वेड के हाथों तीन छक्के खाने वाले शाहिन अफरीदी को गालियां पड़ी।

फुटबॉल के यूरो कप फाइनल में पेनाल्टी मिस करने पर इंग्लैंड के फुटबॉल खिलाड़ियों को उनके देश वालों ने खूब गालियां दी, यहां तक की सड़कों पर गुस्साए फैंस ने हिंसा भी की।

ऐसे अनगिनत उदाहरण आपको मिल जाएंगे। इसलिए इस चीज से ना ही कोई खेल अछूता है, ना ही कोई खिलाड़ी और ना ही कोई देश। खिलाड़ियों को इसी के साथ जीने की आदत डाल लेनी चाहिए क्योंकि कोई भी जानबूझकर गलती नहीं करता, गलती होने पर सबको बुरा लगता है। और गाली देने वालों अपने आप से एक सवाल पूछो क्या आपने कभी अपने गांव या गली में क्रिकेट खेलते हुए आजतक कोई ग़लती नही की ?? कोई तुम्हें उसके लिए गाली देता तो कैसा लगता।