हल्द्वानी में 4500 मुस्लिम परिवार होंगे बेघर! क्या है सच्चाई

हल्द्वानी में 4500 मुस्लिम परिवार होंगे बेघर! क्या है सच्चाई

उत्तराखंड (हल्द्वानी): हल्द्वानी को लेकर के सोशल मीडिया पर काफी हंगामा मचा हुआ है क्योंकि 4500 लोगों को बेघर किया जा रहा है। शासन के द्वारा घरों के बाहर नोटिस लगा दिया गया है कि 1 सप्ताह के अंदर अंदर अपने अपने घरों को खाली कर दें क्योंकि इन पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्योंकि इस कार्रवाई में लोगों के घरों पर बुलडोजर चलेगा और सभी मकानों को ध्वस्त किया जाएगा आखिर ऐसी नौबत क्यों आई हम आपको बताते हैं। 2.2 Km लंबी एक बस्ती है रेलवे ट्रैक के बराबर में जिसको लेकर के पूरा विवाद चल रहा है और वहां के लोग रातों को प्रदर्शन कर रहे हैं बाकायदा कैंडल मार्च निकाल रहे हैं। हल्द्वानी में एक जगह से बंगभूलपुरा वाह पर एक बस्ती है जिसका नाम है गफूर बस्ती।

इस गफूर बस्ती में मुस्लिम समाज बहुसख्यक संख्या में रहते हैं। इस बस्ती में 20 मस्जिद और 9 मंदिर हैं। जिन्हे प्रशासन के द्वारा तोड़ा जायेगा। ये बस्ती 2.2 Km लंबी है जो रेलवे ट्रेक के बराबर मैं है। पिछले 4 दशकों से यह लोग यहां पर रहते और रहे हैं। और और पिछले एक दशक से इस बस्ती को लेकर के कोर्ट में मामला चल रहा था जिसमें रेलवे का कहना था कि यह अतिक्रमण है और इनको यहां से हटाया जाए।

अब जाकर उत्तराखंड हाईकोर्ट ने फैसला रेलवे के समर्थन में सुनाया है उत्तराखंड की सरकार इस केस को हार गई है जो भी लोग इसमें पक्षकार थे वह सब हार गए हैं ऐसे में अब रेलवे और राजस्व विभाग (प्रशासन) के द्वारा वहां पर रह रहे लोगों को नोटिस जारी किया गया है जिसमें केवल 7 दिन का समय दिया गया है। 7 दिन के अंदर उन लोगों को बस्ती खाली करनी है नहीं तो उस जगह पर बुलडोजर चलेगा।

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ऐसे में एक और भी चर्चा चल रही है कि जो बच्चे वहां पर जन्मे है। करीब 4 दशकों से यह लोग यहां पर रह रहे हैं और एक बड़ी तादाद ऐसी है जिनका जन्म भी इन्हीं बस्तियों में हुआ है। ऐसे में रोटी कपड़ा मकान जो मूलभूत सुविधाएं होती हैं। वह सब सरकार की जिम्मेदारी होती है क्या इन लोगों को कोई अल्टरनेट जगह दी जाएगी? क्या सरकार इनके रहने का इंतजाम करेगी? यह सबसे अहम सवाल जो बार-बार सामने आ रहे हैं। उत्तराखंड के अंदर बीजेपी की सरकार है यह मामला काफी चर्चाओं में है।

उत्तराखंड उच्च न्यायालय द्वारा जारी एक आदेश के बाद रेलवे हल्द्वानी रेलवे स्टेशन के पास अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 4300 से अधिक परिवारों को बेदखली नोटिस भेजने के लिए तैयार है। आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है और शीर्ष अदालत 5 जनवरी को याचिका पर सुनवाई करेगी।

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार के इस कदम की आलोचना की। उन्होंने कहा, ‘जब इलाके में तीन सरकारी इंटर कॉलेज हैं तो यह अतिक्रमण कैसे हो सकता है?’