मकर सक्रांति पर जानिए गंगा जी में स्नान का क्या है महत्व?

मकर सक्रांति पर जानिए गंगा जी में स्नान का क्या है महत्व?

मकर सक्रांति पर जानिए गंगा जी में स्नान का क्या है महत्व?


कहा जाता है कि मकर सक्रांति का पर्व एक महत्वपूर्ण दिनों में शुमार होता है मकर सक्रांति के दिन ही मां गंगा धरती पर आई थी और राजा भागीरथ के पीछे पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए मां गंगा सागर में पहुंची थी और इसी के साथ यह भी कहा जाता है कि इसके पीछे एक कथा है इस कथा के अनुसार प्राचीन काल में सूर्यवंशी चक्रवर्ती सम्राट सगर थे। इन सम्राट के दो रानियां थी उनकी एक रानी का नाम केशनी था किशनी से 1 पुत्र असमंजस था लेकिन वहीं दूसरी से 60 हजार पुत्र थे।

1 दिन राजा सगर ने अक्षयमेघ यज्ञ का योजन किया। जिसके लिए राजा ने अपने घरों को छोड़ दिया जिसको राजा इंद्र ने चुरा कर पाताल लोक में कपिल मुनि के आश्रम में बांध दिया। वही राजा ने अपने साठ हजार पुत्रों को घोड़ों की खोज करने के आदेश दिए और उन्हें वापस लाने को कहा जब उन्होंने कपिल मुनि के आश्रम में घोड़ों को बंद है देखा तो उन्होंने आश्रम पर हमला बोल दिया इस हमले से क्रोधित होकर कपिल मुनि ने आंखों की ज्वाला से उनके 60 हजार पुत्रों को एक ही झटके में जलाकर राख कर दिया। इसके बाद जब राजा सगर को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने कपिल मुनि से उनके लिए उद्धार के लिए प्रार्थना की बात की तब मुनि ने बताया कि गंगाजल से ही इनको मुक्ति मिल सकती है राजा ने अपने पोत्र अंशुमन को अपनी राज्य का उत्तराधिकारी बनाया और कब करने के लिए चले गए। इसके बाद अंशुमन के पुत्र राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए बहुत ही कठोर तपस्या की जिससे प्रसन्न होकर मां गंगा ने उनकी प्रार्थना को स्वीकार कर लिया लेकिन एक चिंता मां गंगा को थी कि वह धरती पर कैसे आए इनकी धारा इतनी तीव्र थी कि धरती पर तबाही आ सकती थी इसके लिए भागीरथ के एक बार फिर भगवान शिव की तपस्या की और उनसे मदद की गुहार लगाई।

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भगवान शिव ने तपस्या से प्रसन्न होकर भागीरथ की मदद की उन्होंने अपनी जटा खोल दी और मां गंगा जी को धारण किया और वहां से धरती पर जाने के लिए कहा गया शिव जी की जटाओं से निकली मां गंगा धरती पर मकर सक्रांति के दिन पहुंची थी और आपको बताते चलें कि मां गंगा जी धरती पर गंगोत्री से आई और भागीरथ के पीछे पीछे कपिल मुनि के आश्रम तक पहुंची जहां राजा सगर के साठ हजार पुत्रों को मुक्ति मिली यहीं से वह गंगा सागर में मिल गई।
कहते हैं सनातन धर्म में मकर सक्रांति के पर्व का बहुत ही विशेष महत्व है सूर्य के मकर से आते ही खरमास भी समाप्त हो जाएगा और फिर से मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे और आपको बता दें कि इस दिन के इतने पवित्र होने का एक कारण यह भी है कि इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व होता है इस दिन गंगा में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और अक्षय पुण्य का फल प्राप्त होता है।


मकर सक्रांति के दिन धरती पर पहुंचेगी मां गंगा के पावन जल से स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति तो होती ही है इसके साथ साथ सभी पाप भी नष्ट हो जाते हैं साथ ही सभी कष्टों का निवारण होता है मकर सक्रांति के दिन राजा भागीरथ ने अपने पूर्वजों को तर्पण किया जिससे उनको मुक्ति मिल गई मकर सक्रांति के दिन गंगा सागर में मेल का आयोजन भी किया जाता है।

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