” देशभर में वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी पर 70% अवैध कब्जा”, नमाज के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करें वक्फ बोर्ड

” देशभर में वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी पर 70% अवैध कब्जा”, नमाज के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करें वक्फ बोर्ड

” देशभर में वक्फ बोर्ड की प्रॉपर्टी पर 70% अवैध कब्जा, नमाज के लिए अपनी जमीन का इस्तेमाल करें वक्फ बोर्ड”

हाल ही में चल रहे नमाज विवाद मैं हरियाणा के गुड़गांव का नाम शीर्ष पर आता है। यहां पर कुछ दिनों से चल रहे खुले में नमाज पढ़ने का विरोध कुछ हिंदूवादी संगठन द्वारा हो रहा है। यहां पैदा हुए विवाद के स्थाई समाधान को लेकर राज्य वक्फ बोर्ड ने अपने अधिकार क्षेत्र वाले जमीनों का इस्तेमाल करने का फैसला लिया है। राज्य के वक्त बोर्ड ने नमाज के इस्तेमाल में की जाने वाली जमीन को चिन्हित कर अपना काम शुरू कर दिया है। उसका कहना है कि गुरुग्राम में केवल 20 ऐसी जगह है। जिनका इस्तेमाल नमाज के लिए हो सकता है। हालांकि अभी कुछ संपत्तियों पर अवैध कब्जा और अतिक्रमण है। हरियाणा वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष हरीश खान ने कहा कि हम राज्य में अपनी संपत्तियों को चिन्हित कर रहे हैं।

वक्फ बोर्ड एक अरबी शब्द है जिसका इस्तेमाल होता है कि वह प्रॉपर्टी जो अल्लाह के नाम पर दान कर दी गई हो। ताकि उसका इस्तेमाल गरीब गुरबा और अल्लाह की इबादत के लिए हो सके भारत में वक्फ संस्थाओं का वजूद 800 साल से है। शुरुआत मैं मुस्लिम बादशाहों द्वारा दान की गई जमीन की देखभाल करने से देश में अब वक्त बोर्ड के नाम करीब तीन लाख रजिस्टर प्रॉपर्टी है। 4 लाख एकड़ के करीब तो जमीन ही है । रेलवे और डिफेंस के बाद सबसे ज्यादा देश में जमीन वर्क बोर्ड के पास है। लेकिन इस प्रॉपर्टी पर ज्यादातर कब्जा अवैध है और यह ज्यादातर प्रॉपर्टीज विवादों में घिरी हुई है। देशभर में वक्फ बोर्ड के घपले लगभग एक जैसे हैं। बिल्डर या बिजनेस मैन वक्फ की जमीन की पहचान कर बोर्ड मेंबर से संपर्क करते हैं। उन्हें ओने पोन रकम देकर जमीन खरीद दी जाती है और सदस्यों को उनका हिस्सा मिल जाता है। जिन राज्यों में वक्फ की जमीन आसानी से नहीं मिल पाती है। वहां बेहद आसान लीज पर इन्हें बिल्डरों या कारोबारियों को सौंप दिया जाता है। यहां भी बोर्ड के सदस्यों को उनका हिस्सा मिल जाता है। क्योंकि वे लीज के नियम कुछ इस तरह बना देते हैं ताकि प्रॉपर्टी का आसानी से कमर्शियल उपयोग हो सके । उम्मीद तो यह की जाती है कि वक्फ मुस्लिम समुदाय के कल्याण के लिए पैसों का इंतजाम करेगा। लेकिन देश भर के वक्त बोर्ड में अनियमितता और भ्रष्टाचार की भरमार रही है। इस संस्था में जवाबदेही ना के बराबर है। देशभर मैं फिलहाल 30 वक्त बोर्ड है किसी भी वक्त बोर्ड में कम से कम 5 सदस्य होने चाहिए इन सभी सदस्यों को राज्य सरकारें नॉमिनेट करती हैं। यानि वही इस बोर्ड में शामिल होते हैं। जिन्हें उस राज्य की सरकार चाहती है। इन बोर्डों में वही नेता सदर बन पाते हैं जिन्हें सरकार में जगह नहीं मिल पाई होती है। 1995 वक्फ एक्ट के अनुसार सभी बोर्ड का नियमित और ड्रिंक सर्वे होना चाहिए। लेकिन कई सरकारों ने जानबूझकर ऐसा नहीं कराया।

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जब भी कभी वक्फ बोर्ड में व्याप्त भ्रष्टाचार की जांच को लेकर बात आती है। तो बोर्ड के सदस्य अक्सर यह जुमला फेंकते हैं कि “इस्लाम खतरे में है” ऐसा कहकर वे खुद को बचा रहे होते हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के द्वारा इन मकबरा और मजारों की देखरेख की जा रही है। उन्हें लेकर वक्त का अपना दावा रहा है। लेकिन इन धार्मिक विवादों के पीछे लड़ाई पैसों की ही है।

इन सब गड़बड़ियों का ही नतीजा है कि आज देश में वक्फ बोर्ड की 70 फ़ीसदी प्रॉपर्टीज अतिक्रमण का शिकार है। यह सब या तो वक्त बोर्ड मेंबर की मेहरबानी है या फिर सरकारी महकमों की अनदेखी। बोर्ड खुद ही कई स्मारकों का अतिक्रमण करवाता है पहले मुस्लिमों से कहा जाता है कि वह नमाज पढे फिर इसके इबादत की जगह घोषित कर कर आसपास बस्तियां बनवा दी जाती हैं। इन अवैध बस्तियों के पास की जमीन को बेचना या लीज पर देना आसान हो जाता है


अगर वक्फ बोर्ड अपनी सभी प्रॉपर्टी को अपने सही नियम कायदे के अनुसार उपयोग में लाए तो आए दिन चल रही घटनाएं नमाज को लेकर बंद हो सकती हैं। और 70 फ़ीसदी जमीन को अवैध कब्जों से बचाया जा सकता है। जिन पर मुस्लिम समुदाय के लोग आसानी से नमाज पढ़ सकते हैं और यह विवाद थम सकता है। इसलिए वक्फ बोर्ड को चाहिए कि अपनी सभी जमीनों के अवैध कब्जे से निपटकर मुस्लिम समुदाय के लिए मस्जिद तामीर करें और नमाज पढ़ने का माकूल इंतजाम करें। जिससे आए दिन चल रही खुले में नमाज पढ़ने की घटनाओं पर रोक लग सके।
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